जय माता 🐚 दि !

1d24c2bf7c5b319651608ee870c13ffc

 

गुरुवार,  September 7 2017

Navratri Pehle Din Devi Shailputri ki Pooja Ka Vidhan Hai

नवरात्र के पहले दिन देवी दुर्गा के प्रथम रुप मां शैलपुत्री की पूजा और आराधना का विधान हैहिन्दू धर्मग्रंथों के अनुसार,देवी शैलपुत्री का जन्म पर्वतराज हिमालय के यहां हुआ थाइसलिए वे शैलसुता कहलाती हैं। इनका वाहन वृषभ है,इसलिए यह देवी वृषारूढ़ा के नाम से भी जानी जाती हैं।

मां शैलपुत्री के दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल सुशोभित है।नवरात्र के इस प्रथम दिन की उपासना में साधक अपने मन को मूलाधार’ चक्र में स्थित करते हैं, शैलपुत्री का पूजन करने से मूलाधार चक्र’ जागृत होता है और यहीं से योग साधना आरंभ होती है जिससे अनेक प्रकार की शक्तियां प्राप्त होती हैं।

 

मां शैलपुत्री देवी को ऐसा भोग लगाएं

माता रानी को सफेद चीजों का भोग लगाया जाता है। अगर वही चीजें गाय के घी में बनी हो तो व्यक्ति को रोगों से मुक्ति मिलती है और वह रोग मुक्त रहता है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार अपने पूर्व जन्म में ये प्रजापति दक्ष की कन्या के रूप में उत्पन्न हुई थीं। तब इनका नाम ‘सती’ था। इनका विवाह भगवान शंकरजी से हुआ था।एक दिन प्रजापति दक्ष ने यज्ञ का आयोजन किया था जिसमें सभी देवी देवताओं को आमंत्रित किया लेकिन शंकर भगवान को उन्होंने आमंत्रित नहीं किया था

सती अपने हट के कारण अपने पति परमेश्वर भगवान शिव की आज्ञा के बिना ही अपने पिता प्रजापति दक्ष के घर पहुंच गई वहां पहुंचने से उनका बहुत अनादर हुआ और उनके पिता प्रजापति दक्ष ने भगवान शिव का अनादर किया अपशब्द कहे वे अपने पति भगवान शंकर के इस अपमान को सह न सकीं।और अपने आप को यज्ञ की अग्नि में जलाकर भस्म कर लिया।यही सती अगले जन्म में शैलराज हिमालय की पुत्री के रूप में जन्मीं और शैलपुत्री कहलाईं।

हमें सच्चे मन से और विश्वास के साथ माता की पूजा अर्चना करनी चाहिए।

मां शैलपुत्री का ध्यान मंत्र

वंदे वांछितलाभाय चंद्रार्धकृतशेखराम्

वृषारूढ़ां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्

पूणेन्दु निभां गौरी मूलाधार स्थितां प्रथम दुर्गा त्रिनेत्राम्

पटाम्बर परिधानां रत्नाकिरीटा नामालंकार भूषिता

प्रफुल्ल वंदना पल्लवाधरां कातंकपोलां तुंग कुचाम्

कमनीयां लावण्यां स्नेमुखी क्षीणमध्यां नितम्बनीम्

मां शैलपुत्री का स्तोत्र पाठ

प्रथम दुर्गा त्वंहि भवसागर: तारणीम्

धन ऐश्वर्य दायिनी शैलपुत्री प्रणमाभ्यम्

त्रिलोजननी त्वंहि परमानंद प्रदीयमान्

सौभाग्यरोग्य दायनी शैलपुत्री प्रणमाभ्यहम्

चराचरेश्वरी त्वंहि महामोह: विनाशिन

मुक्ति भुक्ति दायनीं शैलपुत्री प्रमनाम्यहम्

शैलपुत्री की कवच :-

ओमकार: मेंशिर: पातुमूलाधार निवासिनी।

हींकार: पातु ललाटे बीजरूपा महेश्वरी॥

श्रींकारपातुवदने लावाण्या महेश्वरी

हुंकार पातु हदयं तारिणी शक्ति स्वघृत।

फट्कार पात सर्वागे सर्व सिद्धि फलप्रदा॥

मां दुर्गा के नौ रूप:-

1-शैलपुत्री- इसका अर्थ-पहाड़ों की पुत्रीहोता है नवरात्रि में पहले दिन मां शैलपुत्रीकी पूजा का विधान पढ़ें।
2-ब्रह्मचारिणी- इसका अर्थ-ब्रह्मचारीणी। दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी कीपूजा का विधान पढ़ें।
3-चंद्रघंटा- इसका अर्थ- चाँद की तरहचमकने वाली। तीसरे दिन मां चंद्रघंटा कीपूजा का विधान पढ़ें।
4-कूष्माण्डा- इसका अर्थ- पूरा जगतउनके पैर में है। चौथे दिन मां कूष्माण्डा देवीकी पूजा का विधान पढ़ें।
5-स्कंदमाता- इसका अर्थ- कार्तिकस्वामी की माता। पांचवें दिन मां स्कंदमातादेवी की पूजा का विधान पढ़ें।
6-कात्यायनी- इसका अर्थ-कात्यायनआश्रम में जन्मि।छठवें दिन मां कात्यायनीदेवी की पूजा का विधान पढ़ें।
7-कालरात्रि- इसका अर्थ- काल का नाशकरने वली। सातवें दिन मां कालरात्रि देवीकी पूजा का विधान पढ़ें।
8-महागौरी- इसका अर्थ- सफेद रंग वालीमां। आठवें दिन मां महागौरी देवी की पूजाका विधान पढ़ें।
9-सिद्धिदात्री- इसका अर्थ- सर्व सिद्धिदेने वाली। नवमी दिन मां सिद्धिदात्री देवीकी पूजा का विधान पढ़ें।

 

संकलक: संजय भुतडा

#हिंदूदेवता

 

 

 

 

 

Advertisements

One comment

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

w

Connecting to %s