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खरी-खरी

“ईद मुबारक” कहता यदि..

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देश में ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगाने वालों का आपने विरोध किया होता!

आतंकियों के एनकाउंटर का समर्थन किया होता!

कश्मीरी पत्थरबाजों का विरोध किया होता!

गौहत्या, गौभक्षण का विरोध किया होता!

‘भारत माता की जय का नारा’ लगा दिया होता!

‘वन्देमातरम्’ गा लिया होता!

कश्मीरी ब्राह्मणों का सहयोग या समर्थन किया होता!
हमने तो टोपी भी पहनी, मजारों पर भी गए, ईद की सेवैंया भी खाई..

आपने कभी रामकथा का प्रसाद पाया, पञ्चामृत पिया?

नहीं! शायद आपकी कुरान/हदीस में इसकी इजाजत नहीं।

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लेकिन कुछ एक अपवाद भी होते हैं, जो होली हमारे साथ मनाते हैं, दिवाली में साथ खाना भी खाते हैं, राम-राम भी करते हैं। जो वास्तव में इस देश को अपना देश मानते हैं,

जो ‘कुरान’ से ज्यादा ‘संविधान’ को मानते हैं, भारतीय संस्कृति और सभ्यता से अपनत्व रखते हैं। जिनका धर्म “वन्देमातरम्” या “भारत माता की जय” कहने से वेंटिलेटर पर नहीं चला जाता।
यदि आप भी ऐसे मुसलमान हैं, तो मैं आप ‘कलाम’ सरीखे मित्रों को ‘ईद की बधाई’ देता हूँ।

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अन्यथा..

कैसे कहूं ईद मुबारक, जिसने राग ‘पाक’ का गाया हो,

कैसे कहूं ईद मुबारक, जिसने माँस ‘गाय’ का खाया हो!
#जय_मातृभूमि

#जय_श्री_राम 🙏
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